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Bundelkhand ka Svatantrata Sangarsha

Bharatiya Svadhinta Aandolan mein Bundelkhand ki Bhumika by: Brajesh Kumar Shrivastava
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Details

Year Of Publication: 2020
Edition: 1st Edition
Pages : xi, 289
Bibliographic Details : Index
Language : Hindi
Binding : Hardcover
Publisher: D.K. Printworld Pvt. Ltd.
Size: 23
Weight: 650

Overview

प्रस्तुत पुस्तक के द्वारा भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में बुन्देलखण्ड की जनता के योगदान को सामने लाने का प्रयास किसा गया है। गांधीजी की बुन्देलखण्ड यात्रा एवं ओरछा के समीप सतार नदी के किनारे चन्द्रशेखर आजाद के हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से कुटिया बनाकर रहने से समस्त बुन्देलखण्ड में तेजी से राष्ट्रवादी भावनाओं का प्रसार हुआ। 1923 के झण्डा सत्याग्रह एवं 1930 के जंगल सत्याग्रह में बुन्देलखण्ड के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ब्रिटिश भक्त देशी रियासत के राजाओं ने जब जनता पर अत्याचार किया तो जनता ने प्रजामण्डल की स्थापना कर उनका विरोध किया। इसी विरोध के फलस्वरूप संक्रांति के मेले के दिन 14 जनवरी 1931 को छतरपुर जिले में जलियाॅवाला बाग की तरह ही चरण-पादुका हत्याकाण्ड घटित हुआ। पं. माखनलाल चतुर्वेदी ने कर्मवीर समाचार पत्र के माध्यम से 1920 में रतौना में खोले जाने वाले कसाई खाने का इतना प्रखर विरोध किया कि सरकार को घबराकर अपनी कसाईखाना खोलने की योजना त्यागनी पड़ी। यह एक ओर बुन्देलखण्ड की धरती पर अंग्रेजों की करारी शिकस्त थी, तो दूसरी ओर पं. माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता की महत्वपूर्ण जीत थी।
सागर के भाई अब्दुलगनी, ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी, केशवराव खाण्डेकर एवं मास्टर बलदेव प्रसाद, दमोह के भैयालाल चैधरी, अजयगढ़ पन्ना के चंदीदीन चैरहा, छतरपुर के पं. रामसहाय तिवारी, टीकमगढ़ के लालाराम वाजपेयी एवं झांसी के भगवानदास माहौर आदि ने बुन्देलखण्ड के स्वतंत्रता संघर्ष को गति, दिशा एवं अर्थ प्रदान किया। इन्हें पं. द्वारका प्रसाद मिश्र एवं पं. सुन्दरलाल तपस्वी का कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन मिला। गोवा मुक्ति आन्दोलन में भी सागर की सहोद्राराय एवं केसरी चन्द मेहता सहित अनेक सत्याग्रहियों ने गोवा जाकर आन्दोलन को सफल बनाया। उक्त सभी घटनाक्रम की रोचक, सहज, सरल, सुबोध एवं तथ्यपरक जानकारी इस पुस्तक में दी गई है। छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षक बन्धुओं सहित प्रत्येक वर्ग के लोगों को यह पुस्तक ज्ञानवर्धक एवं रुचिकर लगेगी।

Contents

भूमिका
बुन्देलखण्ड का मानचित्र
1. 1858 ई॰ से 1920 ई॰ के दौरान सागर में राजनीतिक चेतना का प्रसार
2. 1920 ई॰ का रतौना आन्दोलन
3. रतौना आन्दोलन में समाचार-पत्रों की भूमिका
4. सागर में 1857 की क्रान्ति एवं 1920 के रतौना आन्दोलन का तुलनात्मक अध्ययन
5. 1920 ई॰ के असहयोग आन्दोलन में सागर
6. 1923 ई॰ का झण्डा सत्याग्रह
7. झण्डा सत्याग्रह में मास्टर बलदेव प्रसाद एवं समाचार-पत्रों की भूमिका
8. 1930 का सविनय अवज्ञा आन्दोलन/जंगल सत्याग्रह
9. बैतूल एवं सिवनी का जंगल सत्याग्रह
10. जंगल सत्याग्रह में टीकमगढ़ के लालाराम बाजपेयी की भूमिका
11. बुन्देलखण्ड में गाँधीजी का आगमन
12. सागर में व्यक्तिगत सत्याग्रह
13. सागर में 1942 का भारत छोड़ो आन्दोलन
14. भाई अब्दुल गनी की राष्ट्रवादी चेतना
15. सागर के स्वतन्त्रता संघर्ष में पं॰ ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी की भूमिका
16. दमोह में स्वतन्त्रता संघर्ष
17. पन्ना में स्वतन्त्रता संघर्ष
18. छतरपुर में स्वतन्त्रता संघर्ष
19. छतरपुर का चरण-पादुका हत्याकाण्ड
20. टीकमगढ़ में स्वतन्त्रता संघर्ष
21. बुन्देलखण्ड की रियासतों में प्रजा-मण्डल की स्थापना
22. ओरछा सेवा संघ, बुन्देलखण्ड सेवा संघ एवं बुन्देलखण्ड की रियासतों में पूर्ण उत्तरदायी शासन की स्थापना
23. झाँसी में स्वतन्त्रता संघर्ष
24. गोवा मुक्ति आन्दोलन (1955.1961 ई॰) एवं उसमें सागर जिले की भूमिका
25. स्वतन्त्रता संघर्ष के दौरान बुन्देली लोक-काव्य द्वारा राजनीतिक एवं सांस्कृतिक जागरण
सन्दर्भ ग्रन्थ-सूची

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Books of Brajesh Kumar Shrivastava

“Bundelkhand ka Svatantrata Sangarsha”

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